
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने आबकारी विभाग के कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए पदोन्नति नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने उत्तर प्रदेश सहायक आबकारी आयुक्त सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस संशोधन के बाद अब आबकारी निरीक्षकों को जिला आबकारी अधिकारी (डीईओ) बनने के लिए 15 वर्ष की सेवा पूरी करने की अनिवार्यता नहीं रहेगी।
नई व्यवस्था के अनुसार अब 12 वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने वाले आबकारी निरीक्षक जिला आबकारी अधिकारी पद पर पदोन्नति के लिए पात्र माने जाएंगे। इससे विभाग के सैकड़ों अधिकारियों और कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
क्यों किया गया संशोधन?
अब तक लागू नियमों के तहत आबकारी निरीक्षकों को जिला आबकारी अधिकारी बनने के लिए कम से कम 15 वर्ष की सेवा पूरी करनी होती थी। विभाग में लंबे समय से यह शिकायत उठ रही थी कि पदोन्नति की प्रक्रिया अत्यधिक लंबी होने के कारण अनेक कर्मचारी बिना पदोन्नति पाए ही सेवानिवृत्त हो जाते थे।
कर्मचारियों का कहना था कि 15 वर्ष की अनिवार्य सेवा अवधि के कारण उनके कैरियर विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। कई योग्य अधिकारी उच्च पदों तक पहुंचने से वंचित रह जाते थे, जिससे पूरे संवर्ग में असंतोष का माहौल बना हुआ था।
क्या होगा फायदा?
- आबकारी निरीक्षकों को 3 वर्ष पहले पदोन्नति का अवसर मिलेगा।
- विभाग में रिक्त पदों को भरने में आसानी होगी।
- कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा।
- पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों को राहत मिलेगी।
- प्रशासनिक कार्यों में अनुभवी अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ेगी।
कर्मचारियों में खुशी
नियमावली में संशोधन को आबकारी विभाग के कर्मचारियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से पदोन्नति नियमों में बदलाव की मांग की जा रही थी। सरकार के इस निर्णय से उन कर्मचारियों को विशेष लाभ मिलेगा जो पदोन्नति की पात्रता अवधि पूरी होने का इंतजार कर रहे थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया तेज होगी और अधिकारियों को समय रहते उच्च जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिलेगा। सरकार का यह कदम प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने वाला माना जा रहा है।




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