अवधभूमि

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सड़क बनी, पैसा बचा… फिर भी शासन को नहीं लौटा:


प्रतापगढ़ PWD में करोड़ों की अवशेष धनराशि पर पर्दा
नियम टूटे, जिम्मेदारी तय नहीं**

प्रतापगढ़।
लोक निर्माण विभाग प्रतापगढ़ में सड़क निर्माण कार्य पूरे होने के बाद भी करोड़ों रुपये की अवशेष धनराशि शासन को वापस नहीं की गई। अवधभूमि की पड़ताल में सामने आया है कि कई सड़कों पर स्वीकृत धनराशि खर्च नहीं हुई, इसके बावजूद न तो उसे राजकोष में समर्पित (Surrender) किया गया और न ही शासन को इसकी सूचना दी गई। यह मामला अब गंभीर वित्तीय अनियमितता और नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। यह खरीद वित्तीय वर्ष 2020 में हुई थी।

पड़ताल में क्या सामने आया

  • कई सड़कों पर निर्माण कार्य पूर्ण दिखाया गया
  • पूर्णता प्रमाण-पत्र (Completion Certificate) भी जारी हुए
  • इसके बाद भी लाखों नहीं, करोड़ों रुपये अवशेष रहे
  • अवशेष धनराशि को शासन को लौटाने का कोई रिकॉर्ड नहीं
  • न चालान, न कोषागार जमा, न बजट सरेंडर का आदेश

यानि पैसा बचा, लेकिन सरकारी खाते तक नहीं पहुंचा

नियम क्या कहते हैं?

अवधभूमि ने जब नियमों की पड़ताल की, तो स्थिति और गंभीर निकली—

1. सामान्य वित्तीय नियमावली (GFR), 2017

  • Rule 209 व 210 के अनुसार
    👉 किसी भी योजना में बची धनराशि को वर्ष समाप्ति पर शासन को समर्पित करना अनिवार्य है।
  • अवशेष धनराशि को बिना अनुमति अन्य मद में उपयोग करना प्रतिबंधित है।

2. उत्तर प्रदेश वित्तीय नियमावली / वित्तीय हस्तपुस्तिका

  • कार्य पूर्ण होने के बाद
    👉 अवशेष धनराशि का तत्काल सरेंडर
    👉 कोषागार में जमा कर सूचना शासन को भेजना अनिवार्य

3. लोक निर्माण विभाग संहिता (PWD Code)

  • सड़क निर्माण के बाद
    👉 खर्च और अवशेष का योजना-वार विवरण
    👉 मुख्यालय/शासन को रिपोर्ट अनिवार्य
  • अवशेष धनराशि छिपाना घोर वित्तीय कदाचार माना जाता है।

नियम टूटे, कार्रवाई क्यों नहीं?

पड़ताल में यह भी सामने आया कि—

  • आंतरिक ऑडिट ने समय पर आपत्ति नहीं उठाई
  • स्थानीय लेखा परीक्षा की रिपोर्ट में स्पष्ट सवाल नहीं
  • किसी अधिकारी पर जवाबदेही तय नहीं की गई

यही वजह है कि करोड़ों की रकम पर अब तक परदा पड़ा हुआ है

कानून के तहत क्या कार्रवाई बनती है?

यदि जांच होती है, तो निम्न धाराओं/नियमों के तहत कार्रवाई संभव है—

प्रशासनिक कार्रवाई

  • दोषी अभियंता/अधिकारी का निलंबन
  • रिकवरी आदेश (पूरी अवशेष धनराशि की वसूली)
  • विभागीय जांच (Charge Sheet)

आपराधिक कार्रवाई

यदि धनराशि जानबूझकर रोकी गई या दुरुपयोग की गई हो, तो—

  • IPC धारा 409 – लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात
  • IPC धारा 420 – धोखाधड़ी
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988
    • धारा 7/13 – पद का दुरुपयोग कर आर्थिक लाभ

वित्तीय कार्रवाई

  • विशेष ऑडिट (Special Audit)
  • योजना-वार फॉरेंसिक अकाउंट ऑडिट

निर्माण खण्ड-2 पर सबसे ज्यादा सवाल

पड़ताल में संकेत मिले हैं कि
निर्माण खण्ड-2, प्रतापगढ़ में

यदि आप चाहें तो मैं:

  • अवशेष धनराशि की मात्रा सबसे अधिक है
  • यहीं से करोड़ों के खेल की परतें खुलने की आशंका है

अवधभूमि का सवाल

❓ जब नियम स्पष्ट हैं, तो
करोड़ों की अवशेष धनराशि शासन को क्यों नहीं लौटाई गई?
❓ क्या यह लापरवाही है या जानबूझकर किया गया कृत्य?
❓ क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा?

अब गेंद शासन, वित्त विभाग और जांच एजेंसियों के पाले में है।

निर्माण खण्ड 2 के अधिशासी अभियंता के जवाब में खड़े हुए कई सवाल:



1️⃣ मूल आरोप का सीधा उत्तर नहीं

शिकायत/खबर का मुख्य आरोप था—
“करोड़ों का तारकोल (बिटुमिन) हजम कर लिया गया”

लेकिन जवाब में:

  • कितना बिटुमिन आया?
  • कितना उपयोग हुआ?
  • कितना शेष बचा?
  • किस कार्य में समायोजित किया गया?

इनमें से एक भी ठोस आँकड़ा नहीं दिया गया।

➡️ यह तथ्यात्मक उत्तर से बचने की कोशिश है।


2️⃣ “समायोजन” का कोई प्रमाण नहीं

जवाब में लिखा है कि

“धनराशि/स्टाक को अन्य मार्गों में समायोजित किया गया”

लेकिन नहीं बताया गया—

  • कौन-कौन से मार्ग
  • किस कार्यादेश (Work Order) से
  • किस तिथि को
  • किस एमबी (Measurement Book) में दर्ज
  • किस सक्षम अधिकारी की स्वीकृति से

➡️ बिना दस्तावेज़ के “समायोजन” नियम विरुद्ध दावा है।


3️⃣ शासन को धनराशि लौटाने का कोई प्रमाण नहीं

खबर में सवाल था कि
“अवशेष धनराशि शासन को क्यों नहीं लौटाई गई?”

जवाब में:

  • चालान संख्या
  • कोषागार विवरण
  • जमा तिथि
  • हेड ऑफ अकाउंट

कुछ भी नहीं दिया गया।

➡️ केवल यह कहना कि “समायोजित कर दिया गया”
वित्तीय नियमावली का उल्लंघन है।


4️⃣ उच्चाधिकारियों के निर्देश का हवाला, पर आदेश संलग्न नहीं

जवाब में कहा गया—

“उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार…”

लेकिन:

  • न आदेश संख्या
  • न तिथि
  • न प्रति संलग्न

➡️ यह काल्पनिक या मौखिक निर्देश का सहारा लेने जैसा है, जो स्वीकार्य नहीं।


5️⃣ जवाब व्यक्तिगत नहीं, सामान्य और घुमावदार

यह आख्या:

  • विशेष शिकायत-बिंदुओं पर नहीं
  • बल्कि सामान्य, टालमटोल भाषा में है

➡️ RTI / शिकायत निस्तारण नियमों के अनुसार
बिंदुवार, साक्ष्य-आधारित उत्तर अनिवार्य होता है।


6️⃣ किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं

यदि वास्तव में कोई अनियमितता नहीं थी तो—

  • जिम्मेदार JE
  • AE
  • EE

के स्तर पर सत्यापन व प्रमाण क्यों नहीं जोड़े गए?

➡️ जिम्मेदारी से बचने की स्पष्ट कोशिश।


7️⃣ तकनीकी व वित्तीय ऑडिट का उल्लेख नहीं

इतने बड़े आरोप पर भी:

  • आंतरिक ऑडिट
  • तकनीकी जांच
  • भौतिक सत्यापन

का कोई जिक्र नहीं।

➡️ यह पारदर्शिता के पूर्ण अभाव को दर्शाता है।


🔴 निष्कर्ष (Conclusion)

निर्माण खण्ड-2 का यह जवाब:

  • अपूर्ण
  • असाक्ष्य
  • नियमविरुद्ध
  • और भ्रामक

है तथा
यह घोटाले के आरोपों को खंडित करने में पूरी तरह विफल है।

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