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लोक निर्माण विभाग में स्थानांतरण घोटाले की चर्चा तेज, जूनियरों का तबादला और सीनियरों पर मेहरबानी के आरोप:

प्रतापगढ़/प्रयागराज। लोक निर्माण विभाग में जारी स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रयागराज मंडलीय अभियंता कार्यालय से जारी स्थानांतरण सूची में कथित रूप से बड़े पैमाने पर विसंगतियां सामने आने के बाद विभागीय कर्मचारियों में नाराजगी व्याप्त है। आरोप है कि वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों को बचा लिया गया, जबकि उनसे जूनियर कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार प्रतापगढ़ के प्रांतीय खंड में तैनात वरिष्ठ सहायक बृजेश सेन पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें स्थानांतरण सूची से बाहर रखा गया। वहीं उनसे जूनियर अंकित श्रीवास्तव और अनिल पांडे का तबादला कर दिया गया। इससे विभागीय कर्मचारियों के बीच पक्षपात के आरोपों को बल मिला है।

इसी प्रकार मुन्नीलाल और मुकेश कुमार भी लंबे समय से प्रांतीय खंड में तैनात बताए जा रहे हैं, लेकिन उनका नाम भी स्थानांतरण सूची में शामिल नहीं किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि यदि स्थानांतरण नीति का समान रूप से पालन किया जाता तो लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे सभी कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी।

निर्माण खंड-1 में तैनात आशीष मिश्रा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विभागीय सूत्रों का दावा है कि उनकी तैनाती अवधि भी 10 वर्ष से अधिक हो चुकी है, लेकिन उन्हें भी स्थानांतरण से राहत मिल गई। दूसरी ओर निर्माण खंड-2 के कई कनिष्ठ सहायकों को स्थानांतरित कर दिया गया।

क्या पैसे और पावर का चला खेल?

विभाग के अंदर यह चर्चा भी जोरों पर है कि कुछ कर्मचारियों को प्रभाव और पहुंच के आधार पर बचाया गया तथा कुछ को मनचाही तैनाती दिलाई गई। स्थानांतरण सूची सामने आने के बाद कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किन मानकों के आधार पर चयन किया गया।

कर्मचारियों में रोष

स्थानांतरण सूची को लेकर कर्मचारियों के बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है। कई कर्मचारियों का कहना है कि यदि नीति का निष्पक्ष पालन किया जाता तो वरिष्ठता, तैनाती अवधि और नियमों को प्राथमिकता दी जाती। लेकिन मौजूदा सूची में कई ऐसे नाम हैं जिन्हें स्थानांतरण से बाहर रखा गया, जबकि कम अवधि वाले कर्मचारियों को दूसरे जनपदों और खंडों में भेज दिया गया।

जांच की उठी मांग

स्थानांतरण सूची पर उठ रहे सवालों के बीच अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन आधारों पर वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों को यथावत रखा गया और जूनियर कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया।

लोक निर्माण विभाग की स्थानांतरण सूची ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नियमों से ज्यादा प्रभाव और पहुंच का महत्व है, या फिर वास्तव में स्थानांतरण नीति का पालन किया गया है।

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