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आबकारी विभाग में भूचाल! ओवररेटिंग–तस्करी पर फूटा प्रमुख सचिव का गुस्सावर्चुअल मीटिंग में कड़े तेवर, स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट तलब — मार्च क्लोजिंग से पहले बड़ी कार्रवाई तय:


लखनऊ। प्रदेश के आबकारी विभाग में इस समय हड़कंप मचा हुआ है। उच्चस्तरीय वर्चुअल समीक्षा बैठक में पूरे उत्तर प्रदेश में ओवररेटिंग और शराब तस्करी का मुद्दा छाया रहा। लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को लेकर मार्च क्लोजिंग से पहले चल रहे दबाव के बीच प्रमुख सचिव ने सख्त लहजे में कहा कि “राजस्व की आड़ में अवैध वसूली और तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
बैठक में सभी जोनल, मंडलीय और जिला स्तरीय अधिकारियों को जोड़ा गया था। समीक्षा के दौरान कई जिलों से आई शिकायतों, फील्ड रिपोर्ट और गोपनीय इनपुट पर विस्तार से चर्चा हुई।
स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, जिन जोनों से सर्वाधिक शिकायतें मिली हैं, वहां की विस्तृत रिपोर्ट स्क्रीनिंग कमेटी से मांगी गई है। प्रमुख सचिव ने संकेत दिए कि रिपोर्ट मिलते ही जिम्मेदारी तय कर सीधे कार्रवाई की जाएगी।
मार्च क्लोजिंग नजदीक है और 60 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य विभाग के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। लेकिन स्पष्ट संदेश दिया गया कि लक्ष्य की पूर्ति के नाम पर दुकानों पर एमआरपी से अधिक वसूली या अवैध सप्लाई को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मेरठ और लखनऊ जोन खास निशाने पर
बैठक में विवादित ज्वाइंट आबकारी अधिकारी दिलीपमणि त्रिपाठी के प्रभार वाले मेरठ और लखनऊ जोन की कार्यप्रणाली पर विशेष चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि इन क्षेत्रों में ओवररेटिंग और सीमाई तस्करी को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं।
कई दुकानों पर निर्धारित दर से अधिक वसूली और पड़ोसी राज्यों में अवैध आपूर्ति के संकेतों ने शासन को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखा तो सीधे जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरेगी।
बस्ती–गोरखपुर पर अलग रिपोर्ट
समीक्षा के दौरान प्रमुख सचिव ने कहा कि बस्ती और गोरखपुर में ओवररेटिंग की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि ये दोनों जनपद सीमावर्ती होने के कारण बिहार तक तस्करी के लिए पहले से चर्चित रहे हैं।
इस पर प्रमुख सचिव ने सीमापार मूवमेंट पर कड़ी निगरानी, चेकिंग अभियान तेज करने और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए।
मीटिंग की बड़ी हाइलाइट्स
 ओवररेटिंग और तस्करी पर जीरो टॉलरेंस की घोषणा
 स्क्रीनिंग कमेटी से तत्काल विस्तृत रिपोर्ट तलब
 मेरठ और लखनऊ जोन में विशेष निगरानी के आदेश
 सीमावर्ती जिलों में सघन चेकिंग अभियान के निर्देश
 मार्च क्लोजिंग से पहले बड़े प्रशासनिक फैसलों के संकेत
 लक्ष्य की पूर्ति के साथ पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्देश
विभाग में बढ़ी बेचैनी
वर्चुअल मीटिंग के बाद विभागीय हलकों में घबराहट साफ दिखाई दे रही है। अधिकारी स्तर पर जवाबदेही तय होने की आशंका से हलचल तेज है। संकेत हैं कि शासन इस बार उदाहरण पेश करने के मूड में है ताकि नए वित्तीय वर्ष में राजस्व प्रणाली अधिक पारदर्शी और नियंत्रित रहे।
स्पष्ट है कि मार्च क्लोजिंग से पहले आबकारी विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल संभव है और ओवररेटिंग व तस्करी के मुद्दे पर आने वाले दिनों में कई चौंकाने वाले फैसले सामने आ सकते हैं।

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