
आबकारी विभाग द्वारा बीते अप्रैल माह में ही 104 करोड रुपए के ड्रग शराब और अवैध धातुओं की बरामदगी करते हुए उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर चल रही शराब और ड्रग तस्करी की पोल खोल दी है। सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि जो भी बरामदगी हुई है वह पुलिस के प्रयास से हुई है।
क्यों नहीं निर्धारित की गई पर्यवेक्षक अधिकारियों की जिम्मेदारी
यदि एक महीने में ही 104 करोड रुपए के ड्रग और शराब की तस्करी का मामला सामने आया है तो जिन क्षेत्रों में यह बरामद की हुई है उनके पर्यवेक्षक अधिकारियों को जवाब देह मानते हुए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है कि छोटे-छोटे प्रकरण में कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। 5 से 6 इंक्रीमेंट रोके गए फिर ऐसे में इतनी बड़ी तस्करी के लिए संयुक्त आबकारी आयुक्त आईबी जैनेंद्र उपाध्याय को क्यों नहीं निलंबित किया जा रहा है। कार्रवाई नहीं होने से यह भी चर्चा है कि मुख्यालय के सभी बड़े अधिकारी इस तरह के तस्करी के संरक्षक रहे हैं और शासन में भी शराब माफियाओं के लोग बैठे हैं।




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