
जौनपुर। धीरे-धीरे अब सारी स्थिति साफ होती जा रही है। पहले कहा जा रहा था कि मायावती ने धनंजय सिंह का टिकट काटकर श्याम सिंह यादव को चुनाव मैदान में उतारा है लेकिन अब कुछ और ही कहानी सामने आ रही है। बताया जा रहा है की बीजेपी कैंडिडेट कृपा शंकर सिंह के खिलाफ धनंजय सिंह के चुनाव मैदान में उतरने के बाद भाजपा की स्थिति यहां न केवल कमजोर हो गई बल्कि वह तीसरे स्थान पर पहुंच गई थी और मुख्य मुकाबला सपा और बसपा में होने वाला था। स्थिति को भापते हुए और धनंजय सिंह को काबू में करने के लिए उन्हें पुराने मामले में जेल भेजा गया जेल जाने के बाद धनंजय सिंह को एहसास हो गया कि वह बहुत देर तक शासन सत्ता के विरुद्ध नहीं खड़े रह पाएंगे और उन्होंने हथियार डाल दिया। कहां तो यहां तक जा रहा है कि एक डील भाजपा के साथ धनंजय सिंह की हुई थी इसके बाद धनंजय की बेल का विरोध अभियोजन पक्ष की ओर से नहीं हुआ और वहां एक ऐसे गंभीर आपराधिक मामले में जेल से बाहर निकल आए जिसमें बेल लगभग नामुमकिन थी। कथित तौर पर जो भी सौदेबाजी हुई थी उसमें यह तय हुआ है कि वह चुनाव मैदान से हट जाएंगे। माना जा रहा है कि धनंजय सिंह के चुनाव मैदान में नहीं होने से क्षत्रिय मतदाता गोलबंद होकर भाजपा को वोट करेंगे और भाजपा यहां पर चुनाव जीत भी सकती है।




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