
लखनऊ/प्रयागराज। आबकारी विभाग की विवादित तबादला सूची को लेकर लगातार उठाए जा रहे सवालों और अवध भूमि न्यूज़ द्वारा प्रकाशित खबरों का असर दिखाई देने लगा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार निरीक्षक इकबाल खान का स्थानांतरण आदेश निरस्त कर दिया गया है। हालांकि, इस कार्रवाई के बावजूद पूरे तबादला प्रकरण पर उठे सवाल अभी भी शांत नहीं हुए हैं।
गौरतलब है कि अवध भूमि न्यूज़ ने प्रमुखता से यह मुद्दा उठाया था कि मुख्यालय के विधि अनुभाग में लगभग डेढ़ वर्ष से कार्यरत निरीक्षक इकबाल खान का स्थानांतरण बिजनौर कर दिया गया था, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति में मात्र नौ माह शेष थे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने प्रार्थना-पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि उन्हें मानव संपदा पोर्टल पर विकल्प भरने की प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी और यदि जानकारी होती तो वह अपनी सेवानिवृत्ति की स्थिति का हवाला देते हुए स्थानांतरण से छूट का अनुरोध करते।
खबर प्रकाशित होने के बाद मामला विभाग और शासन स्तर तक पहुंचा, जिसके बाद इकबाल खान का स्थानांतरण निरस्त कर दिया गया। इससे यह सवाल और मजबूत हुआ है कि यदि स्थानांतरण पूरी तरह नियमों और नीति के अनुरूप था तो फिर उसे वापस लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
इकबाल खान को राहत, लेकिन अमित अग्रवाल पर सवाल कायम
इकबाल खान का स्थानांतरण रद्द होने के बावजूद आबकारी आयुक्त के निजी सहायक अमित अग्रवाल को लेकर उठे सवाल अभी भी बरकरार हैं। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि अमित अग्रवाल वर्षों तक प्रयागराज मंडल में कार्यरत रहे, वहीं रहते हुए उन्हें पदोन्नतियां भी मिलीं, लेकिन तबादला सूची में उनका नाम नहीं आया।
कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि यदि स्थानांतरण नीति का उद्देश्य लंबे समय से एक स्थान पर जमे कर्मचारियों को हटाना था, तो फिर कुछ लोगों को इससे बाहर क्यों रखा गया? यही वह सवाल है जिसका जवाब अभी तक विभाग की ओर से नहीं दिया गया है।
पूरी ट्रांसफर प्रक्रिया की जांच की मांग
इकबाल खान के मामले में राहत मिलने के बाद अब कर्मचारियों का कहना है कि केवल एक आदेश निरस्त कर देने से पूरा विवाद समाप्त नहीं हो जाता। मांग की जा रही है कि पूरी तबादला सूची की समीक्षा कर यह स्पष्ट किया जाए कि—
- किन कर्मचारियों को किस आधार पर स्थानांतरित किया गया?
- किन लोगों को तबादले से छूट दी गई?
- क्या सभी मामलों में समान नियम लागू किए गए?
- क्या प्रभावशाली लोगों को विशेष संरक्षण दिया गया?
अवध भूमि न्यूज़ की खबर के बाद बढ़ा दबाव
विभागीय हलकों में चर्चा है कि लगातार उठते सवालों और मीडिया में प्रकाशित खबरों के कारण विभाग को इकबाल खान के मामले में निर्णय बदलना पड़ा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अन्य विवादित तबादलों की भी समीक्षा होगी और क्या अमित अग्रवाल सहित उन मामलों पर भी स्पष्टीकरण आएगा जिन पर कर्मचारियों द्वारा लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल, इकबाल खान को राहत मिल गई है, लेकिन आबकारी विभाग की पूरी ट्रांसफर प्रक्रिया और उसमें कथित दोहरे मापदंडों को लेकर विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है।




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